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यह नाम डॉक्टर रामदेव त्रिपाठी द्वारा दिया गया एवं वही इसके प्रथम आश्रमाध्यक्ष भी बने। प्राचीन समय की गुरुकुल व्यवस्था मे...
यह नाम डॉक्टर रामदेव त्रिपाठी द्वारा दिया गया एवं वही इसके प्रथम आश्रमाध्यक्ष भी बने। प्राचीन समय की गुरुकुल व्यवस्था में सबसे प्राथमिक तथ्य शांति था। नेतरहाट विद्यालय भी शहर के शोर-शराबे से दूर एक शांत स्थल पर स्थापित है, जिससे यहां के छात्रों को परम शांति की अनुभूति होती है और वह शांत चित्त से अध्ययनरत रहते हैं। शांति के विषय में ईश्वर से प्रार्थना है: शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन में, जल में,थल में और गगन में, अंतरिक्ष में, अग्नि में, पवन में, औषधि वनस्पति, वन- उपवन में, सकल विश्व के जड़ चेतन में, शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन में।
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    यह नाम डॉक्टर रामदेव त्रिपाठी द्वारा दिया गया एवं वही इसके प्रथम आश्रमाध्यक्ष भी बने। प्राचीन समय की गुरुकुल व्यवस्था में सबसे प्राथमिक तथ्य शांति था। नेतरहाट विद्यालय भी शहर के शोर-शराबे से दूर एक शांत स्थल पर स्थापित है, जिससे यहां के छात्रों को परम शांति की अनुभूति होती है और वह शांत चित्त से...
    यह नाम डॉक्टर रामदेव त्रिपाठी द्वारा दिया गया एवं वही इसके प्रथम आश्रमाध्यक्ष भी बने। प्राचीन समय की गुरुकुल व्यवस्था में सबसे प्राथमिक तथ्य शांति था। नेतरहाट विद्यालय भी शहर के शोर-शराबे से दूर एक शांत स्थल पर स्थापित है, जिससे यहां के छात्रों को परम शांति की अनुभूति होती है और वह शांत चित्त से अध्ययनरत रहते हैं। शांति के विषय में ईश्वर से प्रार्थना है: शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन में, जल में,थल में और गगन में, अंतरिक्ष में, अग्नि में, पवन में, औषधि वनस्पति, वन- उपवन में, सकल विश्व के जड़ चेतन में, शांति कीजिए प्रभु त्रिभुवन में।
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